मुरुनगुर कर रामनवमी
-अशोक "प्रवृद्ध"
जाग उठलक मुरुनगुर, जागल प्राचीन सान,खुदी साहू चबूतरा में, विराजे हनुमान।
बजरंगी कर कृपा बरसे, गूंजे जय श्रीराम,
रामनवमी कर धूम देखू, सउभे गोटे ग्राम।
ढोल-ताशा कर थाप बाजे, लहरत भगवा झंडा,
रामभक्त मनक हिया में, भक्ति कर बरसे ठंडा।
अस्त्र-शस्त्र कर खेल देखाईं, मुरुनगुर कर बीर,
रामकुमार कर संग सउभे, धरें हृदय में धीर।
पुरखा मनक बनावल ई, पावन हनुमान थान,
मुरुनगुर कर माटी में, राम नाम कर सान।
गली-गली और डहर-डहर, गूंजे सुंदर गान,
रामनवमी कर ई उत्सव, हमर असली पहचान।
जय श्रीराम! जय हनुमान! गूंजे ऊंच आवाज,
मुरुनगुर कर रामभक्त, राखें गांव कर लाज।
रामभक्त हनुमान की जय!
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